Sunday, June 13, 2010




कलमदंश के इस अंक में मिलिये



पानीपत के वरिष्ठ शायर ज़नाब अख़ग़र पानीपती साहब से
इनका जन्म १ अगस्त १९३४ को मुल्तान में हुआ
इंटर तक शिक्षा पानीपत में ही और अब पानीपत शुगर मिल की नौकरी से सेवानिवृत



अख़ग़र साहब के अब तक ३ संग्रह प्रकाशित


उजालों का सफर उर्दू में


अर्पण हिंदी में


अक्षर नतमस्तक हैं हिंदी में



मुशायरों व कविसम्मेलनों में भागीदारी करते हुए अखंग़र साहब पानीपत रत्न एवं विविध सरकारी एवं गैरसरकारी सम्मानों से विभूषित


प्रस्तुत हैं अख़ग़र पानीपती की ग़ज़ल

तू आप अपनी नज़र में बुरा है मियां
तो कौन शख्स ज़माने में पारसा है मियां

हरेक अपने अहमाल का मुरक्का है
न कोई अच्छा न कोई यहां बुरा है मियां

न जाने कब कोई आंधी उड़ा के ले जाये
हयात गोया परिंदे का घोंसला है मियां

वफा की जिंस तो दुनिया से हो गई नापेद
वफ़ा के नाम पे बस काम चल रहा है मियां

किसी के जौर के शाकी तो हम नहीं लेकिन
हमारे जप्त की कोई तो इंतिहा है मियां

फ़ना के साये में रह कर खुशी से जीता है
बशर के देखने लायक ये होंसला है मियां

मेरे वजूद में सुकरात आ गया शायद
ग़मों के ज़हर को पीकर ये झूमता है मियां

कड़कती धूप में अख़गर पे जो है सायफिग़न
किसी फक़ीर की वो दी हुई दुआ है मियां

15 comments:

  1. अच्छी सुंदर रचना पढ़वाने के लिए धन्यवाद.

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  2. Yogendra ji 'kalamdansh' to aapki patrika thi .....aapne nya blog bnaya hai kya .....????

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  3. अखगर पानीपती जी से परिचय करवाने के लिये धन्यवाद उनकी गज़ल बहुत अच्छी लगी। शुभकामनाये।

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  4. अंकल ब्लाग मे कबूतर उड रहे है मुझे दो कबूतर पकड के दे दो ।

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  5. न जाने कब कोई आंधी उड़ा के ले जाये
    हयात गोया परिंदे का घोंसला है मियां

    फ़ना के साये में रह कर खुशी से जीता है
    बशर के देखने लायक ये होंसला है मियां

    वाह...वा...लाजवाब ग़ज़ल...हर शेर पर कहना पड़ता है...सुभान अल्लाह...

    नीरज

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  6. मेरे ब्‍लाग पर आने के लिए शुक्रिया। यहां आकर भी अच्‍छा लगा। पहली ही प्रस्‍तुति बहुत जानदार है। बधाई और शुभकामनाएं।

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  7. ....गजल बहुत ही जानदार है!

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  8. ...धमाकेदार इंट्री ... स्वागतम !!!!

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  9. ... आप ने आचार्य जी को "jeete raho....." का आशीर्वाद दिया है ... आप पहुंचे हुये महापुरुष लग रहे हो ... कुछ न कुछ आपसे भी ब्लागजगत को सीखने-जानने का मौका अवश्य मिलेगा ....स्वागतम ... स्वागतम ...!!!!

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  10. ताऊ जी बहुत बढ़िया ...कलमदंश का यह रूप और भी बढ़िया लगा..और पहली प्रस्तुति ही बेहतरीन ...महान शख्सियत से मिलकर बहुत खुशी हुई....ग़ज़ल प्रस्तुति भी बेहतरीन....

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  11. जनाब अख़ग़र पानीपती साहब का कलाम पढ़ने का अवसर देने के लिए आभार ! सारे शे'र बहुत अच्छे हैं । उस्तादाना क़लम को सलाम !
    योगेन्द्र मौद्गिलजी , कलमदंश फिर से मिल गया , नेट पर ही सही … यह मेरे लिए बहुत ख़ुशी की बात है । आगे भी अच्छी रचनाएं मिलती रहेंगी , आपकी परख - दृष्टि पर पूरा भरोसा है ।

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  12. पुत्र
    तू जन्म के पश्चात सुप्त अवस्था मे चला गया
    लिखो किसी का भी गुणगान करो
    पापा जी

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